कांग्रेस ने शुरू की जिला अध्यक्षों के चयन की नई प्रक्रिया

नई दिल्ली/रायपुर | 23 सितंबर 2025

कांग्रेस हाईकमान ने संगठन सृजन अभियान के तहत छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को पूरी तरह नई दिशा दी है। इस बार चयन केवल सिफारिशों पर नहीं, बल्कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर आधारित होगा।

छत्तीसगढ़ में खासतौर पर यह कदम अहम माना जा रहा है। अब जिला अध्यक्ष पद के दावेदारों का भविष्य पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर टिका होगा। पर्यवेक्षक जिलों का दौरा कर दावेदारों के कामकाज, छवि, लोकप्रियता और संगठनात्मक सक्रियता पर जानकारी जुटाएंगे। इस दौरान वे प्रत्येक दावेदार की प्लस और माइनस दोनों तरह की रिपोर्ट तैयार करेंगे।

मिली जानकारी के अनुसार, पर्यवेक्षक अपने स्तर पर चर्चा और फीडबैक लेने के बाद 3 से 6 नामों का पैनल तैयार करेंगे और इसे हाईकमान को सौंपेंगे। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व उस पैनल का क्रॉस-चेक कराएगा, ताकि किसी भी प्रकार की गुटबाज़ी या दबाव की गुंजाइश न रहे।

कांग्रेस की इस नई प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल राजनीतिक सिफारिश या गुटीय समर्थन से अब जिला अध्यक्ष पद हासिल करना आसान नहीं होगा। हालांकि प्रदेश प्रभारी और पीसीसी चीफ की राय को महत्व दिया जाएगा, लेकिन अंतिम निर्णय हाईकमान की ओर से पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर आधारित ही होगा।

इस व्यवस्था से मौजूदा निष्क्रिय जिला अध्यक्षों की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। कई जिलों में लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सुस्ती देखने को मिल रही थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति में पद बचाना लगभग असंभव होगा। सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं के लिए यह नई प्रक्रिया अवसर लेकर आई है, जबकि निष्क्रिय पदाधिकारियों की धड़कनें तेज होना लाजमी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम आगामी चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। जिला स्तर पर यदि संगठन मज़बूत और सक्रिय रहेगा तो पार्टी न केवल जनाधार को बनाए रख सकेगी, बल्कि विपक्षी दलों से सीधी टक्कर लेने की स्थिति में भी होगी।

नई प्रक्रिया से कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ने की संभावना है क्योंकि अब संगठनात्मक योगदान और जनता से जुड़ाव ही जिला अध्यक्ष पद के लिए मुख्य मानदंड होंगे।

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रिपोर्टर: विजय सिन्हा | Sachbolo