Chhattisgarh sets schedule for district president selection; observers to submit reports, final list expected around November 10.
छत्तीसगढ़ में जिलाध्यक्ष चयन की प्रक्रिया में तेजी
रायपुर, 26 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ में जिलाध्यक्षों के चयन के लिए राज्य कांग्रेस ने एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई है। 4 से 20 अक्टूबर तक नियुक्त पर्यवेक्षक संबंधित जिलों का दौरा करेंगे और हर दावेदार की संगठनात्मक सक्रियता, जनाधार और कार्यशैली का मूल्यांकन करके रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इस प्रक्रिया के तहत पर्यवेक्षक हर जिले में जाकर जिला कार्यकर्ताओं, पार्टी नेताओं और स्थानीय समाज से बातचीत करेंगे। उनकी रिपोर्ट में प्रत्येक दावेदार की सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का विवरण शामिल होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाएगी।
रिपोर्ट जमा होने के बाद, दीपावली के बाद वन-टू-वन चर्चा के लिए सभी दावेदारों को बुलाया जाएगा। इस चर्चा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वेणुगोपाल जी हर दावेदार से व्यक्तिगत रूप से संवाद करेंगे और उनके नेतृत्व, योजना और संगठनात्मक दृष्टिकोण का मूल्यांकन करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद, लगभग 10 नवंबर 2025 के आसपास जिला अध्यक्षों की अंतिम सूची जारी होने की संभावना है। इस बार की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक पर्यवेक्षक के साथ एक-एक पीसीसी पदाधिकारी भी अटैच किया गया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि सिफारिश या गुटबाज़ी के आधार पर निर्णय न लिया जाए और केवल संगठन और कार्यशैली के आधार पर ही जिला अध्यक्ष चुने जाएँ।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रणाली से सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को लाभ मिलेगा, जबकि निष्क्रिय या केवल राजनीतिक सिफारिश पर निर्भर नेताओं की स्थिति कमजोर होगी। इसके अलावा, यह कदम आगामी चुनावी तैयारियों में भी सहायक होगा, क्योंकि मजबूत जिला नेतृत्व से पार्टी का जनाधार बढ़ेगा और चुनावी रणनीति और प्रभावी ढंग से लागू हो सकेगी।
इस बदलाव से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है, क्योंकि अब पद के लिए संगठन में योगदान और जनता से जुड़ाव को महत्व मिलेगा। यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए स्थानीय नेतृत्व और संगठनिक मजबूती को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ में जिला अध्यक्षों के चयन की नई प्रणाली पारदर्शिता, निष्पक्षता और संगठनिक क्षमता को महत्व देती है। 4 से 20 अक्टूबर तक पर्यवेक्षकों के दौरे, दीपावली के बाद वन-टू-वन चर्चा और 10 नवंबर तक संभावित सूची जारी होने की प्रक्रिया से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं दोनों के लिए यह एक सकारात्मक और प्रेरक कदम है।