रायपुर के फाफाडीह में 49वें बाबा रामदेव जयंती उत्सव पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें 51 कन्याओं ने कलश यात्रा निकाली और देर रात महाआरती संपन्न हुई।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बाबा रामदेव जयंती का उत्सव इस वर्ष अपनी पूरी भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ मनाया गया।
श्रीलक्ष्मी रणछोड़ धर्मार्थ न्यास द्वारा संचालित बाबा रामदेव मंदिर, फाफाडीह चौक के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का यह 49वां वर्ष था।
इस अवसर पर राजधानी की सड़कों पर भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा वातावरण 'जय बाबा री' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
मंगलवार की सुबह से ही मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी, जो बाबा के दर्शन और शोभायात्रा में सम्मिलित होने के लिए आतुर थे।
न्यास के पदाधिकारियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं, जिसका परिणाम शहर की सड़कों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के रूप में देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार सुबह 9 बजे बाबा रामदेव मंदिर के प्रांगण से हुई, जहां से बाबा रामदेव पीर की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
इस शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण बाबा रामदेव पीर की प्रतिमा की वह दिव्य छवि थी, जिसे एक विशेष रूप से सुसज्जित रथ पर विराजमान किया गया था।
रथ को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
बाजे-गाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ जब यह यात्रा आगे बढ़ी, तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर नृत्य करने लगे।
शोभायात्रा में शामिल भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था और हर कोई बाबा की एक झलक पाने के लिए लालायित नजर आ रहा था।
यह भव्य शोभायात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी।
यात्रा का मार्ग फाफाडीह चौक से होते हुए देवेंद्र नगर चौक तक तय किया गया था, जहां स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया।
इसके पश्चात शोभायात्रा टिंबर मार्केट स्थित पाटीदार भवन पहुंची।
यहां स्थित कच्छ कड़वा पाटीदार भवन में बाबा रामदेवजी की प्रतिमा को पूर्ण विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के साथ स्थापित किया गया।
प्रतिमा स्थापना के इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने बाबा के जयकारे लगाए।
स्थापना के पश्चात दोपहर के समय विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें न्यास के पदाधिकारियों सहित समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस शोभायात्रा के साथ ही आयोजित कलश यात्रा ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान खींचा।
इस कलश यात्रा में कुल 51 कन्याओं ने हिस्सा लिया, जो अपने सिर पर पवित्र कलश धारण कर समाजजनों और बंधुओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं।
कन्याओं द्वारा प्रदर्शित इस भक्ति की शक्ति ने उपस्थित जनसमुदाय को प्रभावित किया।
यह कलश यात्रा भी मुख्य शोभायात्रा के साथ देवेंद्र नगर चौक से होते हुए टिंबर मार्केट स्थित पाटीदार भवन तक पहुंची।
कलश धारण किए हुए कन्याओं का अनुशासन और उनकी श्रद्धा भाव इस पूरे आयोजन की आध्यात्मिकता को और अधिक प्रगाढ़ बना रहे थे, जिससे उत्सव की शोभा में चार चांद लग गए।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ इस अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें भक्ति संगीत की अविरल धारा बही।
स्थानीय गुजराती कलाकारों के साथ-साथ प्रसिद्ध गायिका शीतलबेन व्यास और उनकी मंडली द्वारा बाबा के भजनों और कीर्तनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।
भक्ति गीतों की इन प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद प्रत्येक श्रद्धालु को भाव-विभोर कर दिया।
पाटीदार भवन में आयोजित इस भजन संध्या में लोग देर तक बाबा की भक्ति में डूबे रहे।
कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से बाबा रामदेव पीर की महिमा का गुणगान किया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय ऊर्जा से भर गया।
उत्सव का भव्य समापन मंगलवार की मध्यरात्रि को हुआ।
श्रीलक्ष्मी रणछोड़ धर्मार्थ न्यास द्वारा रामदेव पीर बाबा की प्रतिमा की स्थापना और दिन भर चले विभिन्न कार्यक्रमों के बाद रात्रि 12 बजे महाआरती का आयोजन किया गया।
इस महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने जलते हुए दीपों के साथ बाबा की आरती उतारी।
महाआरती के दौरान भक्तों ने बाबा रामदेव पीर से अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
न्यास के पदाधिकारियों ने बताया कि 49 वर्षों की यह परंपरा आज भी उसी उत्साह के साथ जारी है और आने वाले वर्षों में इसे और भी भव्य रूप देने का संकल्प लिया गया है।
महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण के साथ इस गरिमामय आयोजन का समापन हुआ।