छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं हेतु आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया है। मोर बिजली ऐप और मीटर रीडरों के माध्यम से यह प्रक्रिया जारी है लेकिन रिकॉर्ड में त्रुटि होने पर अब हर गुरुवार को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य डेटा विसंगतियों को दूर कर पा
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं हेतु आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया है। मोर बिजली ऐप और मीटर रीडरों के माध्यम से यह प्रक्रिया जारी है लेकिन रिकॉर्ड में त्रुटि होने पर अब हर गुरुवार को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य डेटा विसंगतियों को दूर कर पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, अधिकांश उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन के माध्यम से घर बैठे ही 'मोर बिजली ऐप' का उपयोग कर ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण कर रहे हैं।
यह ऐप उपभोक्ताओं के लिए एक सुलभ माध्यम साबित हुआ है
, जहां चंद मिनटों में आधार नंबर और ओटीपी के जरिए सत्यापन किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, जो उपभोक्ता तकनीकी रूप से स्वयं यह कार्य करने में सक्षम नहीं हैं
, उनके लिए बिजली कार्यालयों में विशेष काउंटरों की व्यवस्था की गई है।
साथ ही, घर-घर जाकर मीटर रीडिंग करने वाले कर्मचारियों को भी इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया है।
मीटर रीडर अपने पास उपलब्ध उपकरणों के माध्यम से मौके पर ही उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी डेटा अपडेट कर रहे हैं
, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी राहत मिल रही है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान विभाग के सामने एक प्रमुख तकनीकी चुनौती उभर कर आई है, जिसमें कई उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन के रिकॉर्ड और उनके आधार कार्ड में दर्ज नाम या अन्य विवरणों में अंतर पाया जा रहा है।
कई मामलों में पुराने बिजली बिलों में नाम की स्पेलिंग गलत है या उपनाम का उल्लेख नहीं है, जबकि आधार कार्ड में जानकारी भिन्न है।
इस डेटा विसंगति (Data Mismatch) के कारण 'मोर बिजली ऐप' के माध्यम से स्वचालित सत्यापन की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
उपभोक्ताओं की इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने अब मैदानी स्तर पर विशेष समाधान तंत्र विकसित किया है ताकि त्रुटियों को तत्काल सुधारा जा सके।
उपभोक्ताओं की सुविधा और विसंगतियों के त्वरित निराकरण के लिए राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के सभी जोनल कार्यालयों में रोजाना विशेष डेस्क संचालित की जा रही है।
इसके साथ ही, विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि प्रदेश के सभी संभाग कार्यालयों में प्रत्येक गुरुवार को विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
इन साप्ताहिक शिविरों का मुख्य उद्देश्य उन जटिल मामलों का निपटारा करना है जहां नाम या पते की त्रुटि के कारण ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है।
इन शिविरों में विभागीय अधिकारियों के साथ तकनीकी टीम भी उपस्थित रहेगी, जो उपभोक्ताओं के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कर मौके पर ही डेटा में सुधार करेगी, जिससे उपभोक्ता का आधार लिंक होना संभव हो सकेगा।

विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ई-केवाईसी की यह कवायद न केवल विभाग के डेटाबेस को आधुनिक बनाने के लिए है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के हितों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।
आधार लिंकिंग के माध्यम से बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और वास्तविक उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
इसके अलावा, भविष्य में लोड बढ़ाने, कनेक्शन ट्रांसफर करने या बिल संबंधी शिकायतों के ऑनलाइन निपटारे में भी आधार प्रमाणीकरण एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रदेश के शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं का डेटा आधार से जोड़ दिया जाए ताकि डिजिटल गवर्नेंस के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
विभाग ने प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं से विशेष अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सहयोग करें और समय रहते अपनी ई-केवाईसी पूर्ण कराएं।
उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे जब भी विशेष शिविरों या जोनल कार्यालयों में सुधार के लिए पहुंचें, तो अपने साथ आधार कार्ड की मूल प्रति, नवीनतम बिजली बिल और अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर अवश्य रखें।
मोबाइल नंबर साथ रखना इसलिए आवश्यक है क्योंकि सत्यापन की प्रक्रिया ओटीपी आधारित होती है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय पर ई-केवाईसी न कराने वाले उपभोक्ताओं को भविष्य में विभागीय योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है, इसलिए इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष के तौर पर, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की यह पहल राज्य की विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विशेष रूप से गुरुवार को आयोजित होने वाले शिविर उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए एक वरदान साबित होंगे जो तकनीकी विसंगतियों के कारण परेशान थे।
'मोर बिजली ऐप' की सुविधा और मैदानी स्तर पर शिविरों के संयोजन से यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश में ई-केवाईसी का कार्य जल्द ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा।
उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे इस सरकारी पहल का लाभ उठाएं और अपनी विद्युत सेवाओं को आधार से जोड़कर भविष्य की असुविधाओं से बचें।