भिलाई के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत डे कुमार साहू ने कोहका स्थित अपने घर में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार पत्नी से अलगाव और पारिवारिक विवाद के कारण वे गहरे मानसिक तनाव में थे। बीएसपी के ब्लास्ट फर्नेस विभाग में कार्यरत इस युवा कर्मचारी का शव जमीन पर पड़ा मिला और फिलहाल पुलिस मामले की सूक्ष्मता से जांच कर रही है।

घटना का विस्तृत विवरण देते हुए परिजनों ने बताया कि डे कुमार साहू अपनी मां भेल बाई साहू के साथ कोहका में रह रहे थे।

हालांकि बीएसपी के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका पता दुर्ग बस स्टैंड के पास दर्ज था, लेकिन वे अपनी मां की देखभाल के लिए उनके साथ ही निवास कर रहे थे।

घटना वाली रात डे कुमार ने सामान्य रूप से भोजन किया और अपने कमरे में सोने चले गए।

अगली सुबह जब काफी देर तक उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो मां उन्हें जगाने पहुंचीं।

कमरे के भीतर का दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला था;

डे कुमार ने फंदा लगा लिया था, लेकिन शरीर का वजन अधिक होने के कारण फंदा टूट गया और उनका शव जमीन पर पड़ा मिला।

डे कुमार साहू की नौकरी की पृष्ठभूमि भी काफी संवेदनशील रही है।

उन्हें भिलाई स्टील प्लांट में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति मिली थी, क्योंकि उनके पिता मेडिकल आधार पर अनफिट घोषित कर दिए गए थे।

उनके करियर का एक लंबा समय अभी बाकी था और आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उनका रिटायरमेंट वर्ष 2045 में होना तय था।

एक युवा कर्मचारी का इस तरह अचानक चले जाना परिवार के लिए न केवल भावनात्मक क्षति है, बल्कि उनके भविष्य और भरण-पोषण पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर गया है।

संयंत्र में उनकी सेवा के अभी दो दशक से अधिक का समय शेष था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया।

पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और साक्ष्य जुटाने की कोशिश की।

शव को अपने कब्जे में लेकर पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल भेजा।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया, जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि आत्महत्या के सटीक कारणों का स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सके।

मृतक के पारिवारिक जीवन के बारे में मिली जानकारी के अनुसार, डे कुमार पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक दबाव में थे।

उनकी पत्नी पल्लवी साहू अपनी सात वर्षीय बेटी गौरांगी के साथ काफी समय से उनसे अलग रह रही थीं।

इस अलगाव ने डे कुमार को मानसिक रूप से काफी कमजोर कर दिया था।

उनके परिवार में तीन बहनें भी हैं, जिनमें से दो भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में ही रहती हैं और एक रायपुर में निवासरत हैं।

परिवार में चल रहे इस बिखराव और पत्नी-बच्ची से दूरी के कारण वे अक्सर गुमसुम रहते थे।

सहयोगियों का मानना है कि इसी आंतरिक घटन और तनाव के चलते ही उन्होंने ऐसा कठोर कदम उठाया होगा।

डे कुमार के साथ काम करने वाले विभागीय साथियों ने उन्हें एक मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति के रूप में याद किया।

ब्लास्ट फर्नेस विभाग के सहयोगियों का कहना है कि वे कार्यस्थल पर हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते थे और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थे।

हालांकि, वे अपने निजी जीवन की परेशानियों और मानसिक द्वंद्व को कभी किसी के साथ साझा नहीं करते थे।

उनके शांत स्वभाव के पीछे छिपे इस दर्द का अंदाजा किसी को नहीं था।

फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आस-पड़ोस के साथ-साथ उनके विभागीय सहयोगियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना की कड़ियों को जोड़ा जा सके।