सच बोलो रिपोर्ट। लोकभवन में मनाई गई विश्वकर्मा जयंती* रायपुर, 17 सितंबर 2026/लोकभवन में आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती धूमधाम से मनाई गई।
सच बोलो रिपोर्ट। लोकभवन में मनाई गई विश्वकर्मा जयंती* रायपुर, 17 सितंबर 2026/लोकभवन में आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती धूमधाम से मनाई गई।
मुख्य पूजा अनुष्ठान के दौरान राज्यपाल श्री रमेन डेका और श्रीमती रानी डेका काकोटी ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विश्वकर्मा का विधि-विधान से पूजन और अर्चन संपन्न किया।
उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र अग्नि प्रज्वलित की और भगवान को धूप, दीप, गंध तथा विशेष नैवेद्य अर्पित किए।
भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को संपूर्ण ब्रह्मांड का दिव्य वास्तुकार और आदि शिल्पकार माना गया है, जिन्होंने देवताओं के दिव्य अस्त्रों और भव्य महलों का निर्माण किया था।
राज्यपाल दंपति ने भगवान की आरती उतारी और प्रदेश की जनता के सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष मंगल कामना की।
इस दौरान वहां उपस्थित विद्वान पंडितों ने शास्त्रोक्त विधियों का पालन करते हुए मंत्रों का उच्चारण किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने इस पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए देश तथा छत्तीसगढ़ राज्य की खुशहाली, शांति और निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।
उन्होंने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि भगवान विश्वकर्मा केवल एक पौराणिक पात्र नहीं हैं
, बल्कि वे सृजन, निर्माण और तकनीकी कौशल के सर्वोच्च अधिष्ठाता देव हैं।
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि उनकी कृपा और आशीर्वाद से ही हमारे समाज में औद्योगिक क्रांति और भौतिक विकास के कार्यों को गति प्राप्त होती है।
उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के उन लाखों श्रमिकों
, शिल्पकारों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को हार्दिक बधाई दी
, जो अपने पसीने और अद्वितीय कौशल से राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र के नवनिर्माण में हर हाथ का योगदान महत्वपूर्ण है और भगवान विश्वकर्मा हमें कर्मठता की प्रेरणा देते हैं।

लोकभवन में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में प्रशासनिक जगत की भी सक्रिय भागीदारी और विशेष उत्साह देखने को मिला।
राज्यपाल के सचिव डॉ.
सी.आर.
प्रसन्ना और विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा दुबे ने भी इस पावन पूजा-अर्चना में पूर्ण श्रद्धा के साथ भाग लिया।
इन वरिष्ठ अधिकारियों ने भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा के सम्मुख नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने प्रशासनिक दायित्वों को और अधिक कुशलता, पारदर्शिता तथा सत्यनिष्ठा के साथ निभाने का नया संकल्प लिया।
लोकभवन के विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस धार्मिक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सामूहिक रूप से प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रार्थना की।
अधिकारियों ने इस अवसर पर एक-दूसरे को बधाई दी और कार्यस्थल पर एक सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित करने पर बल दिया।
लोकभवन के समस्त अधिकारी और कर्मचारी भी इस पावन उत्सव के दौरान एक अटूट सूत्र में बंधे हुए नजर आए।
विश्वकर्मा जयंती के इस विशेष अवसर पर सरकारी कार्यालयों, कार्यशालाओं और तकनीकी कक्षों में यंत्रों, औजारों और मशीनों की पूजा करने की गौरवशाली भारतीय परंपरा का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया गया।
कर्मचारियों ने सुबह से ही अपने-अपने कार्यस्थलों की विशेष साफ-सफाई की और उन्हें फूलों से सजाया।
उन्होंने भगवान विश्वकर्मा से अपने दैनिक कार्यों में निपुणता, सुरक्षा और सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगा।
इस दौरान लोकभवन परिसर में सामूहिक रूप से प्रसाद और मिठाइयों का वितरण किया गया, जिससे कर्मचारियों के बीच हर्ष, उल्लास और आपसी भाईचारे की भावना और भी सुदृढ़ हुई।
इस आयोजन ने कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने और उनमें सेवा भाव को और गहरा करने का काम किया।
अंततः, लोकभवन में आयोजित यह भव्य विश्वकर्मा जयंती समारोह केवल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने मानवीय श्रम के प्रति अगाध सम्मान और सृजन की अनंत शक्ति को नमन करने का एक सशक्त संदेश दिया।
राज्यपाल और प्रथम महिला की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की महत्ता को एक नई ऊंचाई प्रदान की और वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के भीतर गौरव का भाव जगाया।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी विकसित समाज या राष्ट्र के निर्माण में आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक तकनीकी दक्षता का समन्वय ही प्रगति का असली आधार है।
पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस दिन को लेकर जो व्यापक उत्साह और भक्ति का माहौल देखा गया, लोकभवन का यह कार्यक्रम उसी गौरवशाली परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अध्याय बनकर उभरा।