सच बोलो रिपोर्ट। भारतीय मजदूर संघ (BMS) छत्तीसगढ़ के बैनर तले प्रदेशभर से जुटे हजारों कर्मचारियों और श्रमिकों ने राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर एक दिवसीय महारैली और जोरदार प्रदर्शन किया।

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वार्ता के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा विद्युत विभाग के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का रहा।

इस विषय पर सरकार ने स्पष्ट किया कि चूंकि राज्य शासन के अन्य विभागों के कर्मचारियों को पहले ही पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है, इसलिए विद्युत कर्मियों को इससे वंचित नहीं रखा जाएगा।

सरकार ने इस मांग पर सैद्धांतिक सहमति जताते हुए कहा कि इसे लागू करने के लिए कुछ आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं और विभागीय औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।

इसके लिए शासन ने संघ से कुछ समय की मांग की है ताकि व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।

पॉवर कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर भी गंभीर चर्चा हुई।

इस मामले में सरकार ने एक मध्यमार्ग अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में संविदा कर्मियों के लिए लागू किए गए हालिया आदेशों और वहां की व्यवस्था का गहन अध्ययन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ सरकार मध्यप्रदेश के मॉडल का विश्लेषण करने के बाद प्रदेश के संविदा कर्मियों के हित में उचित और ठोस निर्णय लेगी।

इस आश्वासन के बाद संविदा कर्मचारियों में नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना प्रबल हो गई है।

रायपुर में भारतीय मजदूर संघ की महारैली के बाद सरकार से वार्ता सफल, पुरानी पेंशन और नियमितीकरण पर बनी सहमति

बैठक में जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मध्यान्ह भोजन रसोइयों और आशा वर्करों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया।

उनके मानदेय में वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के विषय पर शासन ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।

भारतीय मजदूर संघ के अनुसार, सरकार ने इन वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है और इसे जल्द से जल्द लागू करने का भरोसा दिलाया है।

यह कदम महिला कार्यबल की आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रायपुर में भारतीय मजदूर संघ की महारैली के बाद सरकार से वार्ता सफल, पुरानी पेंशन और नियमितीकरण पर बनी सहमति

महारैली और सफल वार्ता के बाद भारतीय मजदूर संघ ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।

हालांकि, संगठन ने यह भी साफ कर दिया है कि वे केवल आश्वासनों पर निर्भर नहीं रहेंगे।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जिन मांगों पर सहमति बनी है, उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर संगठन निरंतर पैनी नजर रखेगा।

जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक और ठोस आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

बीएमएस ने स्पष्ट किया कि संगठन का अगला कदम सरकार द्वारा तय समय सीमा में लिए जाने वाले निर्णयों पर आधारित होगा।