सच बोलो रिपोर्ट। आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए राज्य शासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

बैठक में राज्य के प्रमुख मंत्रियों की उपस्थिति ने इस विषय की गंभीरता को रेखांकित किया।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और वित्त मंत्री ओ.पी.

चौधरी ने चर्चा में भाग लेते हुए उपार्जन केंद्रों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर बल दिया।

मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि धान खरीदी शुरू होने से पहले सभी उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक भौतिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि किसानों को अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए लंबी कतारों या बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना न करना पड़े।

किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष एक बड़ा कदम उठाया गया है।

बैठक में जानकारी दी गई कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश भर में 360 नए धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं।

इन नए केंद्रों के खुलने से न केवल मौजूदा केंद्रों पर भीड़ कम होगी, बल्कि किसानों को अपने घर के नजदीक ही फसल बेचने की सुविधा मिलेगी।

उप समिति ने स्पष्ट किया कि इन केंद्रों पर केवल कागजी तैयारी नहीं, बल्कि धरातल पर शेड, शुद्ध पेयजल, आधुनिक तौल-कांटे और कंप्यूटर सिस्टम जैसी सुविधाएं समय रहते स्थापित की जानी चाहिए ताकि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनी रहे।

धान खरीदी में बारदानों की उपलब्धता हमेशा एक महत्वपूर्ण कारक रहती है।

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए विपणन संघ (मार्कफेड) ने अग्रिम योजना पर काम शुरू कर दिया है।

बैठक में बताया गया कि जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से कुल 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है।

राहत की बात यह है कि अब तक 1.14 लाख गठान बारदाने राज्य को प्राप्त हो चुके हैं।

उप समिति ने शेष बारदानों की खेप को भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर मंगवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि खरीदी के पीक सीजन में बारदानों की कमी के कारण उपार्जन कार्य प्रभावित न हो।

बैठक के एजेंडे में पिछले वर्ष की कस्टम मिलिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल रहा।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत अब तक की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि 89 लाख टन चावल जमा करने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 37.50 लाख टन चावल ही जमा कराया जा सका है।

वर्तमान में मिलरों के पास 51.50 लाख टन चावल का स्टॉक शेष है, जिसे जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2027 निर्धारित की गई है।

उप समिति ने इस धीमी गति पर चिंता जताते हुए मिलिंग प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग करने और चावल जमा करने की रफ्तार में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, और नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी विलास भोसकर ने समिति को तैयारियों की तकनीकी जानकारी दी।

साथ ही वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार और सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

अंत में, समिति ने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और धान खरीदी के महाभियान को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।