AAP’s Sanour conflict worsens as Ranjodh Singh Hadana is appointed Sanour assembly head: scandal-tainted MLA Pathanmajra remains fugitive after rape, cheating charges: this controversial move sparks outrage in Punjab politics and questions AAP’s leadership: internal crisis mounts over AAP scandal, Pathanmajra escape case, and Sanour constituency controversy.
AAP के लिए यह घोषणा बहुत बड़ी शर्मिंदगी लेकर आई है। सन्मान और जिम्मेदारी की बात छोड़िए — जब पार्टी खुद अपनी साख खो रही हो, तो ऐसे वक्त में Sanour विधानसभा के लिए Ranjodh Singh Hadana को प्रभारी बनाना सिर्फ राजनीतिक भूल नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि पार्टी AAP विवाद और Pathanmajra केस की बदनामी से बचने की कोशिश कर रही है।
पहले स्थिति यह थी कि Sanour सीट के विधायक Harmeet Singh Pathanmajra पर बलात्कार, धोखा और धमकी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। वह गिरफ्तार हुआ, लेकिन गिरफ्तार होते ही पुलिस हिरासत से फरार हो गया — और अभी तक पकड़ा नहीं गया। जब विधायक न्यायिक प्रक्रिया से भागता हो, तब उसी क्षेत्र की जिम्मेदारी कैसे संभाली जा सकती है? यह घटना नीतिगत कमजोरी और पार्टी की आलोचनात्मक छवि की पुष्टि करती है।
Hadana को प्रभारी नियुक्त करते समय कहा गया कि इससे इलाके में पार्टी गतिविधियों को "ताज़ा उत्साह" मिलेगा। पर सवाल यह है: उत्साह किसके लिए? उन लोगों के लिए जो न्याय चाहते हैं या उन दोषियों से जवाब चाहते हैं? जब विधायक ही आरोपों के घेरे में हो, तो उसकी जगह छोड़कर जिम्मेदारी किसे दी जा रही है? यह AAP की प्रशासनिक अक्षम्यताएँ दिखाता है।
MLA Pathanmajra की गिरफ्तारी के बाद नए प्रभारी की नियुक्ति से लग रहा है कि पार्टी ने उत्तरदायित्व का बोझ टाल दिया है। जिसकी साख दागदार हो, वही जिम्मेदारी छोड़ दी जाए और नया चेहरा बाहर से लाया जाए — यह निर्णय डर और बचाव की मानसिकता जैसा दिखता है।
Hadana की पृष्ठभूमि भी सवालों के घेरे में है। वह एक राज्य-स्वामित्व वाली रोड ट्रांसपोर्ट कंपनी के अध्यक्ष रहे हैं, पर क्या उनका अनुभव Sanour जैसे संवेदनशील क्षेत्र के प्रभारी होने के लिए पर्याप्त है? जनता मान रही है कि यह नियुक्ति सिर्फ छवि प्रबंधन है — आरोपों को छुपाने या दबाने का प्रयास।
Sanour के मतदाताओं के लिए यह निर्णय अस्वीकार्य है। जब विधायक न्यायिक प्रक्रिया से बच रहा हो, तो प्रभारी बनना किसी तरह की जिम्मेदारी को साझा करना है — और पार्टी इस जवाबदेही से हटती दिख रही है। यह कदम पार्टी की नैतिकता, पारदर्शिता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।
विरोधी दलों ने भी इस निर्णय को राजनीतिक सुरक्षा और व्यक्तिगत हित के तौर पर देखा है, न कि सार्वजनिक हित या कानून की रक्षा के लिए लिया गया कदम। AAP की यह चाल दिखाती है कि लोक विश्वास धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।
निष्कर्ष: इस तरह की नियुक्तियाँ AAP की छवि को और नुकसान पहुंचा रही हैं। जब तक विधायक Pathanmajra पर कानूनी कार्यवाही पूरी नहीं होती, जनता के मन में AAP के फैसलों की वैधता और जवाबदेही पर संशय बना रहेगा। Sanour की यह नियुक्ति यह संदेश देती है कि आरोपों से प्रभावित नेताओं पर सवाल उठाने की बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है — और यह राजनीतिक आत्म-घात है।