राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर में स्वास्थ्य जागरण कार्यक्रम का सफल आयोजन

रायपुर, 23 सितंबर 2025: सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सरस्वती विहार में आज राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर एक विशेष स्वास्थ्य जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

समाहरणीय रूप से संपन्न हुए इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रांत संघचालक तथा प्रमुख अतिथि श्री टोप लाल वर्मा प्रमुख वक्ता रहे।

समारोह में डॉ.

अजय कुलश्रेष्ठ, डॉ.

राजेन्द्र अग्रवाल, डॉ.

मनोहर लहेजा, प्राचार्य श्री गिरीश चंद्र वर्मा, श्री गिरधारी सागर, श्री तेजराम साहू, डॉ.

दिनेश जैन, श्री नेतराम शर्मा (वरिष्ठ आचार्य) सहित समस्त आचार्यगण और बड़ी संख्या में भैया-बहन उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती, भारत माता और ओम के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन तथा सरस्वती वन्दना से हुआ, जिसके बाद आयोजकों ने उपस्थित जनसमुदाय का स्वागत किया और आयुर्वेद के महत्व पर संक्षेप में प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस - कार्यक्रम से एक झलक

कार्यक्रम के दौरान प्रमुख वक्ताओं ने आम जनजीवन में अपनाए जाने योग्य सरल और प्रभावी स्वास्थ्य-प्रबंधन के सूत्र साझा किए। डॉ. राजेन्द्र अग्रवाल ने आयुर्वेदिक जीवनशैली और दैनिक दिनचर्या के महत्व पर बल देते हुए बताया कि कैसे नियमित स्नान, सही आहार-व्यवस्था, पर्याप्त नींद और मानसिक संतुलन से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने घर पर आसानी से उपलब्ध जड़ी-बूटियों और मसालों के उपयोग पर भी विशेष टिप्स दिए।

डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ ने बच्चों और वृद्धों के लिए सुरक्षित घरेलू नुस्खों का वर्णन किया और बताया कि तुलसी, अदरक, हल्दी व लौंग जैसे सामान्य मसाले किस प्रकार ज्वर, खांसी, पेट संबंधी समस्याओं और सूजन में त्वरित लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने स्थानीय भाषा में सरल उदाहरण देकर उपस्थित लोगों को इन नुस्खों की तैयारी और प्रयोग की विधि समझाई।

डॉ. मनोहर लहेजा ने आयुर्वेद के सिद्धांतों के वैज्ञानिक पक्ष को सहज भाषा में समझाते हुए बताया कि आयुर्वेद केवल रोग-निवारण का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन को स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित बनाए रखने का विज्ञान है। उनके व्यावहारिक सुझावों ने श्रोता वर्ग को प्रेरित किया कि वे आयुर्वेदिक प्रथाओं को अपनी दैनिक आदतों में शामिल करें।

आयुर्वेद जागरण में भाग लेते हुए उपस्थित जन

समारोह में प्रांत संघचालक श्री टोपलाल वर्मा ने स्वास्थ्य जागरण और स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की कला पर विस्तृत भाषण दिया। श्री वर्मा ने कहा कि आयुर्वेद का ज्ञान घर-घर तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है ताकि लोग बीमार पड़ने से पहले ही सतर्क उपाय अपनाकर गंभीर बीमारियों से बच सकें। उन्होंने सभी आचार्यों और उपस्थित समुदाय से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में आयुर्वेदिक शिक्षा और स्वास्थ्य बचाव संबंधी संदेश का प्रचार-प्रसार करें।

इस अवसर पर आरोग्य भारती की ओर से एक चार पृष्ठीय विशेष पाम्फलेट 'मसालेदार दवाइयां और चटपट इलाज' वितरित किया गया, जिसमें घरेलू उपचारों, मसालों के औषधीय गुणों और त्वरित राहत देने वाले नुस्खों का संकलन था। पाम्फलेट में उन घरेलू उपायों का विस्तृत ब्यौरा था जिन्हें लोग आसानी से अपने घरों में आजमा सकते हैं।

विद्यालय के प्राचार्य श्री गिरीश चंद्र वर्मा ने कार्यक्रम के समापन में अतिथियों और सभी उपस्थित जनों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। प्राचार्य ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल स्वास्थ्य-साक्षरता बढ़ाते हैं बल्कि समुदाय में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय भविष्य में भी सामाजिक स्वास्थ्य अभियानों का आयोजन करता रहेगा ताकि छात्रों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधित जानकारी नियमित रूप से मिलती रहे।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में धन्यवाद ज्ञापन किया गया तथा शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन स्थल पर उपस्थित अनेक नागरिकों ने कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि आयुर्वेदिक उपायों के प्रति उनकी समझ अब और स्पष्ट हुई है और वे घर पर इन सरल उपचारों को अपनाने के लिए उत्साहित हैं।

स्थानीय समुदाय एवं विद्यालय प्रशासन की संयुक्त प्रेरणा से आयोजित इस आयोजन ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उद्देश्य — आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और जनमानस में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने — को साकार रूप से दर्शाया।

कार्यक्रम की मुख्य बातें:

  • समारोह का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वन्दना के साथ हुआ।
  • प्रमुख वक्ताओं द्वारा सरल आयुर्वेदिक स्वास्थ्य-प्रबंधन सूत्र साझा किए गए।
  • घरेलू मसालों और तुलसी, अदरक आदि के त्वरित उपचारों पर व्यावहारिक सुझाव दिए गए।
  • आरोग्य भारती की ओर से चार पृष्ठीय पाम्फलेट वितरित किया गया।
  • प्राचार्य द्वारा धन्यवाद एवं शांति पाठ के साथ समापन हुआ।

सचबोलो न्यूज़ — इस प्रकार के शैक्षिक और स्वास्थ्यसम्बंधी कार्यक्रम समाज के समग्र कल्याण के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनके माध्यम से आयुर्वेद का प्राचीन ज्ञान आज की जीवनशैली में उपयोगी रूप से प्रासंगिक बनता है।